#354. पलकें ख़ुशी और गम में भीगी थीं।।

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#564. तेरी ख़ामोशी… (Teri Khamoshi…)

सब कुछ कह गई तेरी ख़ामोशी।

पर मेरी नम आँखों से तुझे कुछ पता ना चला।।
Sab kuch kehe gai teri Khamoshi,

Par Meri Nam Aankhon se tujhe kuch pta na chala.

-mयंक

#562. साहब टिकेट है फ़र्ज़ी….

Holi का Season चल रहा है। कल मैं Office से निकला और जल्दी से Anand Vihar Bus Stand पहुँचा और Moradabad की Bus में बैठा, और बैठते ही Bus Conductor ने कहा कि Ticket 250₹ का होगा, जबकि Ticket 180-181₹ का होता है। मैंने देखा किसी ने ये नही कहा कि इतने का टिकट कैसे, ज्यादा पैसे क्यों ले रहे हो, Bus पर लिखा था U.P Transport की बस है। और Bus भी Bus Stand के अंदर खड़ी थी, इसका मतलब ये था कि Private Bus नही है, पर फिर Ticket इतना महँगा कैसे। पर सच यही है हमारी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिस की गई, क्योंकि सबको घर जाना था, होली थी इसलिए किसी ने कुछ नहीँ कहा सबको इस भ्रष्टाचार से कोई फर्क नहीँ पड़ा, शायद मुझे भी नही। क्योंकि 250₹ का Ticket मैंने भी खरीदा। पर मैं जो कर सकता था वो किया, इनकी Compliant Mail ID पर Mail की, और Compliant Whatsapp No’ पे Msg किया, Msg seen भी हुआ, अब देखिये की कब तक Reply आता है। बस no’ था – H388. और Ticket भी देख लीजिए, Ticket भी फ़र्ज़ी है।।

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सर्जी,

टिकेट है फ़र्ज़ी।।

होली का Season है,

घर जाने का यही Reason है।

बस यही रही गिला,

180 का टिकट 250 में मिला।

अब किसे कन्हे की कौन सही कौन चोर है,

सब यँहा घूसखोर है।।

Bus में कोई नही श्रीष्टाचारी,

सब है इस जुल्म के भागीदारी।

💁mयंक

#561. लड़की हो, पर्दे में रहना सीखो…

खुद की आँखों में हया नहीं है,

और औरतों को पर्दे में रहने का फरमान सुनाते है।।

खुद के मन में मैल छुपा है,

और दूसरे के तन दिखने के बहाने में अपनी हवस छुपाते है।।

कुछ लोग तो बस राय देते है सही कपड़े पहनने की,

और कुछ की ज़ुबान पर घटिया अल्फ़ाज़ आजाते है।।

वो सोचते है कि उनकी लड़की हर चुनोतियों से लड़े,

पर ये नही चाहते की वो मर्दों से आगे बढ़े।।

नारी को अपने पाँव की जूती समझने वाले,

अक्सर ये भूल जाते है।।

की मर्द क्या, भगवान भी धरती पर नारी के गर्भ से होकर आते है।।

💁mयंक

#560. काफिये से काफिया जोड़ने वाले…

अच्छा लिखने वाले नही।

काफिये से काफिया जोड़ने वाले,

अक्सर खुद को शायर समझ बैठते है।।

💁mयंक

काफिया – Rhyme

#559. वक़्त को वक़्त की नज़र लगे…

कभी वक़्त को वक़्त की नजर लगे,

वक़्त अपनी डगर से जा भटके।

चलता है ये बिना रुके,

मेरी दुआ है कभी ये इतवार पर जा अटके।।

🤔mयंक

#556. कड़वी ज़ुबान…

ज़ुबाँ को इतना भी कड़वा न कीजिये की शहद फीका लगने लगे।

अपनों से इतना भी बैर न कीजिये की उनका हर एक शब्द तीखा लगने लगे।।

🤔mयंक

#538. मेरे शब्द ज़हर तो नहीं…? (Mere Shabd zehar to nhi)


मैं किसी की सलाह का मोहताज़ नहीं।

जो किसी का घर जला दे,

वैसे नफरत भरे मेरे अलफ़ाज़ नहीं।।

💝 ©mयंक💝

#537 विश्वास का खंज़र… ( Vishwaas Ka Khanzar)


किसी के पास दिल होने का ये मतलब नही की वो दिलदार भी होगा,

क्या पता उसके मीठे बोल की चाशनी में कौनसा ज़हर घुला होगा।

दूरी बनाकर रखिये ऐसे लोगों से,

क्या पता कब आपकी पीठ पर खंज़र घुसा होगा।।

💝©mयंक 💝

#532. जब शायर की कलम खामोश रहे… ( Jab Shayar ki Kalam Khamosh rahe)

Writer, लेखक, शायर या फिर कवी इन सब की ज़िंदगी में ऐसा पल हमेशा आता है जब ये शब्दों को अपनी कला के इत्र से सुगंधित करते हैं, ये जो भी लिखते है वो हीरा बन जाता है, और इन्हें ये गुमाँ हो जाता है कि इनकी शब्दों की श्याही कभी सूखेगी नही।

पर इनके जीवन में एक वक़्त ऐसा भी आता है जब इनके पास शब्द तो बहुत होते है, भाव भी होता है, पर कलम नहीं चलती है।

ये कुछ ऐसा ही है जैसे किसी से मोहब्बत हो जाये आप कहना तो बहुत कुछ चाहो पर कुछ कह ना पाओ।

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   दिल में एक दर्द उठे,

   इज़हार न कर पाने की कसक चुभे।

   ऐसा ही कुछ शायर के साथ होता है,

   दिल की किताब के पन्नो को फाड़कर,

   वो सारी रात रोता है।।

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मैं कोई शायर तो नहीं, पर हाँ थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है कुछ दिन से, लिखना चाहता हूँ पर लिख नही पाता हूँ।।

हमे खुद से ही लड़ना पड़ता है, ऐसा एहसास होता है मानो की वो लिखने की काबिलियत मुझसे रूठकर मायके चली गई हो, और बिन उसके लिक्खु कैसे।।

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अब उसे मनाने का वक़्त है,

क्योंकि बिन उसके जीवन चलेगा नहीं।

और अगर वि हमेशा के लिए रूठ गई,

तो ” दिल की किताब ” का अस्तित्व रहेगा नहीं।।

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पिछले कुछ वक़्त से जो बीत रहा है मेरे साथ उसे एक पन्ने पर उतारा है-

कुछ पन्ने कोरे हैं,

कुछ तोड़े मरोड़े है।

कुछ पर श्याही फैली है,

कुछ ने अंतिम साँस लेली है।।

शब्दों का अंबार भरा है दिल में,

भावनाओं की नदियाँ बह रही हैं।

सब मशगूल है अपनी ज़िंदगी में,

कोई तो सुनो मेरी कलम क्या कह रही है।।

मैं लिखता हूँ,

मिटाता हूँ।

कुछ दर्द दिखाता हूँ,

कुछ छिपाता हूँ।।

मैं कल तक कहता था- मेरे शब्द ही मेरी पहचान है।

आज ये बिखरे हुए हैं, मानो शब्दों का कोई शमशान है।।

क्या लिक्खु कलम से दर्द किसी और का जब अपने दिल की हालत नाजुक हो।

जरुरी तो नही हर बार पढ़ने वाला भावुक हो।।

टूट सा गया हूँ कुछ इस तरह की खड़ा नहीं होना चाहता हूँ।

अटक गया हूँ शब्दों के जाल में और निकलना नही चाहता हूँ।।

कमी नही है कहानियों की पास मेरे।

पर शब्द रुपी मोती को धागे में पिरो देने का तरीका भूल गया हूँ।।

मोती बिखर चुके है,

धागा टूट गया है।

दिल में शब्द हज़ारों है,

पर कलम का साथ छूट गया है।।

सोचता हूँ फिर कारवाँ शुरू कर लिखने का।

पर अब डर लगा रहता है गिरने का।।

क्या हुआ जो कलम रुक गई है।

अब शब्दों की श्याही नई है।।

नया सफर होगा,

नया अवतार होगा।

नई कहानी होगी,

मेरी ज़ुबानी होगी।।

कलम जो रुकी थी कुछ देर,

अब दौड़ने लगेगी।

कुछ पन्ने खाली रह गए थे,

अब मेरे दिल की किताब भरी मिलेगी।।

मैं लिक्खूँगा पर साथ आपका चाहिये होगा,

अच्छा लिक्खु या बुरा सब आपके हवाले होगा।।

मैं हमेशा लिखता हूँ बस इतनी सी करना कामना।

जो लड़खड़ायें कदम फिरसे, तो तुम मेरा हाथ थामना।।

©mयंक