#380. भ्रूण हत्या की एक कहानी, मेरी जुबानी

अपनी कलम से मैं अपना एक दर्द लिखने जा रहा हूँ।
ना ये शायरी है,
ना ये कविता…
मैं तो बस दर्द-ऐ-ज़खम लिखने जा रहा हूँ।
॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥
नयी नयी हुई शादी थी घर उनके,
बहु आई थी उनके द्वार।
स्वागत हुआ ऐसे ,
जेसे लक्ष्मी आई हो उनके द्वार॥
वो बहु उस घर में घुलने-मिल्ने लगी।
उस घर का एक महत्वपूर्ण अंग बनने लगी॥
एक दिन उसने खुशखबरी अपने पति को सुनाई।
उसके पति को ये बात बहुत रास आई॥
वो दौड़ा, गया अपनी माँ के चरण में।
बोला- माँ कुछ समय बाद एक बच्चा होगा आपकी शरण में॥
माँ उत्साहित थी की कुछ ही दिनों में उसके घर किलकारी गूंजेगी।
पर उसके मन्न में एक सवाल था- लड़का है या लडकी ये बात कैसे पता चलेगी॥
माँ को ये सवाल अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।
कंही बेटी न हो जाए ये डर उसे संताए जा रह था॥
वो एक दिन बेटे को पास बुलाकर बोली-
बेटा देख मुझे लड़का चाहिए किसी भी हाल में।
लड़की हुई तो उसे फ़ेंक देना मृत्यु के जाल में॥
लड़का माँ की बात सुन सकपका गया।
वो बोला- कैसी बात करती हो माँ, तुझे क्या हो गया॥
लड़का हो या लडकी ये तो इश्वर के हाथ में है।
हमे स्वीकार है जो होगा, हमारी किस्मत हमारे साथ में है॥
आया दिन खुशियों  का,
उनके आँगन किलकारी गूंजी।
उनके घर फूल सी कन्या हुई,
सास बोली- अब तो दहेज़ में जाएगी सारी जमा-पूंजी॥
पल बीते,
दिन बीता।
साल बीते,
वक्त बीता ॥
सास के कान में खबर आई फिर होने वाले नन्हे मेहमान की ।
सास बोली बेटे से- या तो मुझे पोता दे वरना में शक्ल देखूंगी कब्रिस्तान की॥
माँ की बातें सुन बेटे के पैर के नीचे से ज़मीन खिसक गई।
उसकी जिंदगी अब दो-राहे पर अटक गई॥
उसने ये बात अपनी पत्नी को बताई।
पत्नी की फिर आँखें छलक आई॥
पत्नी ने किया इनकार परिक्षण से।
पति बहलाने-फुसलाने लगा,
ठीक नही लगा कुछ, उसके लक्षण से॥
पत्नी फिर झांसे में आ गई।
वो परिक्षण के लिए मान गई॥
लिंग जांच कानूनन अपराध है, ये बात पति को पता थी।
पर करानी तो है जांच ये दुविधा थी॥
पति ने फिर पता लगवाया।
एक चिकत्सक जो ये जांच करता है, किसी ने ये बतलाया॥
पति-पत्नी पहुँचे चिकित्सक के पास।
क्यूंकि वही था उनकी आखरी आस॥
चिकित्सक फिर लिंग जांच करने लगा।
अपना धर्म, कर्तव्य, कर्म, पेशा,
वो उसे बेचने लगा॥
वही हुआ जो सास को आशंका थी।
गर्भ में एक मासूम सी कन्या थी॥
बेटे ने फिर अपनी माँ को सच्चाई बताई।
पर माँ को ये बात रास ना आई॥
माँ बोली- तब तक तक घर मत आना।
पहले उसे गिराओ, फिर मुझे अपनी शक्ल दिखाना॥
सास और पति के दबाव में एक माँ आ गई।
ना जाने उस पल, उसकी ममता कंहा गई॥
चिकित्सक ने फिर अपना काम शुरू किया ।
औजारों का ज़खीरा उसने लाकर रक्ख दिया॥
फिर डाल औज़ार वो माँ के गर्भ में उसे टटोलने लगा।
मानो एक सांप अपना शिकार खोजने लगा॥
औज़ार पास आता देख वो कन्या सेहेमने लगी।
“माँ मुझे बचालो” वो ये कहकर चीख-पुकार करने लगी॥
वो औज़ार फिर उस कन्या को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने लगा था।
उस निर्दई चिकित्सक ज़रा भी दया न आई,
मानो जेसे एक लाकडहार पेड़ काटने में लगा था॥
वो अंग काटता गया,
कन्या चीखती रही,
वो अपने पाप के कार्य में आगे बढ़ता रहा।
कन्या की साँसे उखड्ती रहीं॥
हर अंग कट चूका था, सिर्फ एक बाकी था।
आसान काम तो हो गया था,
मुश्किल अभी बाकी था॥
चिकित्सक ने फिर औज़ार बदला, क्यूंकि अब सिर बचा था।
बेरहम क़त्ल तो हो  चूका था,
उसपर मात्र एक औपचारिकता की मोहर लगना बाकि था॥
हर अंग काटा गया, सिर को तोड़ा गया।
मानो अखरोट को पत्थर से फोड़ा गया॥
सिर के फिर सेकड़ो टुकड़े हो गए।
ना जाने इंसान कब और केसे इतने निर्दई हो गए॥
कसाई सा उसका व्याक्तित्व था।
उस चीर-फाड़ के बाद वो औज़ार खून से लत-पत था॥
केसे एक बाप का दिल इतना छोटा हो गया।
पैसे देकर जो वो अपनी बेटी का ही कत्ल करवा गया॥
वो घर लौटे तो सास के चेहरे पर एक चमक थी।
जेसे हत्या न करवाई हो, उसने जीती कोई जंग थी॥
ना हत्या का गम, न चेहरे पर कोई शिकन का भाव था।
उसके चेहरे पर थी तो चमक, पर उसके व्यक्तित्व में इंसानियत का अभाव था॥
मैं आज लिख नही रहा, रो रहा हूँ,
आज कलम सिहाई से नही, आंसुओं से भिगो रहा हूँ॥
मेरे कुछ सवाल है दुनिया वालों तुमसे-
अगर बेटी बरदाश नही,
तो बहु क्यों चाहिए…?
जीवन-संगिनी क्यों चाहिए..???
पत्नी की कोख में कन्या पसंद नहीं।
तो नवरात्रों में कन्या क्यों चाहिए….????
पत्नी की बेटी बरदाश नही,
तो माँ क्यों चाहिए…..???
एक माँ के अंग को तुम नष्ट कर देते हो।
तो अर्धांगिनी क्यों चाहिए…..???
तुम्हे बेटी पसंद नही,
तो अपने लड़के के लिए बहु क्यों चाहिए….???
तुम्हारे वंश को आगे बढ़ने वाली,
उस वंशज को जन्म देने वाली माँ क्यों चाहिए…????
मेरे सवाल लाज़मी समझो तो मेरी बात पर गौर करना।
वरना इस श्रृष्टि के अंत की प्रतीक्षा करना॥
Note- मेने भ्रूण हत्या के तरीके का यंहा ज़िक्र किया है, अगर किसी को मुझसे आपत्ति हो तो वो youtube पर भ्रूण हत्या का video देख सकता है।

और विज्ञान इस बात को साबित कर चूका है की लड़का या लड़की होना महिलाओं पर नहीं पुरुष पर निर्भर करता है,

तो आप अपनी पत्नी या बहु को कन्या के होने का दोष न दे।

लड़का लड़की एक समान।

ये बात कब समझेगा इंसान॥

Advertisements

#321. वेसे तो कई नकाब चढ़ाएँ हें मेने अपने चेहरे पर।।

वेसे तो कई नकाब चढ़ाएँ हें मेने अपने चेहरे पर।।

पर इस कमबख्त आइने से कुछ छुपा नहीं पता हूँ।।

#मयंक

image

#315. Ek sainik ko Vajeer kehne waale mil hi jaate h…

Hume raah se bhatkaane waale mil hi jaate h….
Hme chane ke jhaad pr chdhaane waale mil hi jaate h…
Hmare kandhe par rakh badook chlaate h vo goli…
Ek sainik ko Vajeer kehne waale mil hi jaate h…
❤ ©mayank ❤
image

#314. Aao ” Do (2) Kash (Puff) ” zra tum bhi maarlo….

Aao ” Do (2) kash (Puff) ” zra tum bhi maarlo….
.
Zindgi me h kai utaar chadhaaw…
Kbhi dhoop h to kbhi chaaw….
Zindgi ko hnske jeene ki Aadat daal lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maarlo…
.
Kisi ka dil toota h…
Koi aapse rootha h…
Kisi ki baaten dil ko chubhti h…
Ye baaten sehne ki Aadat Daal lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo….
.
Jeet ke lie mehnat kro,,,
Haaro to gum na kro…
Tarakki kro aage badho..
Haar ka kaaran nikalo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo…
.
Aao Kaam sabke…
Ummid kisi se madad ki na kro…
Neki kro or dariya me daal lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo….
.
Manzil ko paana h…
Ek shi Raasta Apnana h…
Akele manzil tk jaane me kya mza…
Kisi ko apna Hamsafar maan lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo….
.
Rishte nibhao dil se…
Kisi ko dhoka na do….
Esa nhi h jesa tum kro fal vesa mile..
Tum dhoke khaane ki Aadat Daal lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo…
.
Tumhe Apnaenge sbhi jb tk mtlb h unka…
Unke kaam aao ek naav ki tarah…
Fir vo thokar maar tmhe aage badh chlenge…
Ye kalyug h yanha thokar khaane ki aadat daal lo…
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo….
.
Suna h log Bhari(Crowd) mehfil me tanha ho jaate h..
Kisi apne se Ruswa ho jaate h..
Tum baat ko seene me na dbaao..
Uske saamne jaao, or apne dil ki baat nikaal lo…
Aao Do kash zra tum bhi maar lo…
.
Na Jaat dekho na dekho Dharm,
Tum to kro apna Karm..
Har kisi ki Madad kro…
Insaaniyat ko apna Dharm Maan lo..
Aao Do Kash zra tum bhi maar lo…..
.
Do shabd jaane wala yha Gyaani h…
Thoda sa jispe ho vo Abhimaani h….
Aache Bure ki ho Parakh jise..
Usse hmesa Gyaan lo…
Aao do kash zra tum bhi maar lo….
❤ #mayank ❤
.
.
Note- Do kash “khushi ke”….
Aap kuch galat mt smjhna 😉

#303. Tanhaai ke andhere me…

Me akela betha hu tanhaai ke is andhere me…
Tere laut kr aane ki ummid bhi ab onjhal si hone lgi h…

❤ mayank ❤

#301. Unki palkon se brsaat aai… <3

<3Jb din dhla to shaam aai… ❤

❤ Hr pal ke saath teri yaad aai .. ❤

❤ Vo bole ki nhi krte h ab yaad tujhe.<3

❤ Fir unki palkon se brsaat aai… ❤

❤ ©mayank ❤

#297. Alvida 2014

Tere(2015) Aaane ki #Khusi h,
To tere(2014) Jaane ka #Gum…
Chehre par #Muskaan h,,,
To thoda Aankhen h #Num…
Naya saal dega dheroon khushiyaan,,
Par tujhe(2014) kbhi bhula na Paaenge #Hum…
#ALVIDA_2014
#SWAGATAM_2015
#mayank

#295. Ye Jaata hua saal mujhe bahut kuch sikha gya… Good Bye 2014

Ye jaata hua saal mujhe bahut kuch sikha gya…
Apne or praaye me antar bta gya …
Samandar me tha me ye mujhe daldal or sahil me antar dikha gya…
Musibat ke pal paas kon ye bta gya …..
Mere na hone se pdta kise h farq ye ehsaas kra gya….
Ye jata hua saal mujhe bahut kuch bta gya….
Socha tha tanha rehne ka sukoon hi alg h,,
Kise khte h tanhaai ye ehsaas kra gya..
Apno se door rehne ka gum kise khte h ye vo ehsaas kra gya….
Ye mujhe mere apno se door kra gya…
Doori faasle ki or doori rishte ki ye unme antar bta gya….
Ye jaata hua saal mujhe bahut kuch sikha gya…
Mujh azaad panchi ko ek bandhan me babdha gya…
Jin khushiyon se anjaan tha me ye unse mila gya…
Har raah pr bhatka dar-d-dar ya mujhe meri manzil se mila gya….
Ye jaata hua saal mujhe bahut kuch sikha gya…
“Good Bye 2014”
©mayank

#292. Khuda jaane us shaqs me akad kitni thi….

Khuda jaane us shaqs me akad kitni thi…..
Kabra ko bhi uski akad mutabik bnana pda…
~mayank

#291. वक्त ने किसका हाथ थामा हे ……

वक्त ने किसका हाथ थामा हे जो वो रुकेगा ।
कामयाब वही होगा जो आगे बड़ेगा॥
~मयंक

Waqt ne kiska daman thama h jo vo
rukega….
Kamyaab whi hoga jo aage badhega…..
©mayank

image